आयोजक दुर्गा बहादुर थापा ने बताया कि इस खेल का मकसद बस यही दर्शाना है कि महिलाएं भी पुरुषों के बराबर हैं. रेस में भाग लेने वालों को कोई पुरस्कार नहीं दिया गया, उन्हें बस एक प्रमाणपत्र मिला. इस दौड़ ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अपनी शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान किया.
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